क्या आप भी इमोशनल ट्रेडिंग से परेशान हैं? psychology rules for trading से आपको यह जानने को मिलेगा कि, कैसे डर और लालच को काबू करके आप एक प्रोफेशनल और अच्छा ट्रेडर बन सकते हैं।
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि, किसी स्टॉक के ट्रेडिंग चार्ट पर बिल्कुल सटीक सेटअप बना हो, और आपने एंट्री ली, और बस थोड़ा-सा लॉस दिखते ही घबराहट में ट्रेड से एग्जिट हो गए? और सबसे अजीब बात तो तब होती है जब आपके एग्जिट करते ही मार्केट रॉकेट की तरह बनकर आपके टारगेट की तरफ निकल जाता है।
शेयर बाजार के 3 मुख्य साइलेंट किलर्स।
ट्रेडिंग के दौरान जब कभी आप लाइव मार्केट की स्क्रीन के सामने बैठते हैं, तो आपके दिमाग पर मुख्य रूप से तीन प्रकार की भावनाएं कब्जा कर लेती हैं। इनसे बचना ही आपके लिए सबसे अच्छी रणनीति होती है।
1. डर की भावना।
यह डर ही है जो आपको सही ट्रेड में एंट्री लेने से रोकता है, खासकर तब जब आपका पिछला ट्रेड लॉस में गया हो क्योंकि यही बात अक्सर आपको डराती है। इसी डर की वजह से आप अपने प्रॉफिटेबल ट्रेड्स को बहुत जल्दी, छोटे से मुनाफे में ही काट देते हैं।
2. लालच में फसना।
“बस एक और जैकपॉट ट्रेड!” यही सोचकर आप अपनी पोजीशन का साइज बहुत बड़ा कर लेते हैं। लालच आपसे रिस्क मैनेजमेंट के सारे नियम तुड़वाता है और एक ही झटके में पूरा कैपिटल साफ कर देता है।
3. अपने आप से ज्यादा की उम्मीद करना।
ट्रेडिंग में ‘उम्मीद’ रखना सबसे बड़ा पाप है। जब कोई ट्रेड आपके स्टॉप-लॉस के पास आता है, तो आप उसे और नीचे खिसका देते हैं, यह सोचकर कि “यहाँ से मार्केट जरूर पलटेगा।” आप एक ट्रेडर से एक होप-ट्रेडर बन जाते हैं।
अपनी मानसिकता को बदलने के लिए 3 सटीक उपाय।
क्या मार्केट की भविष्यवाणी करना संभव है? बिल्कुल नहीं। जो लोग भविष्यवाणी करने की कोशिश करते हैं, वे सिर्फ अपना ब्रोकरेज बढ़ाते हैं। आपको प्रेडिक्शन छोड़कर संभावनाओं पर काम करना होगा।
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प्रेडिक्शन को कहें अलविदा, संभावनाओं को अपनाएं।
शौकिया ट्रेडर्स सोचते हैं कि उन्हें हर अगली कंडल का पता होना चाहिए। इसके उलट, प्रोफेशनल ट्रेडर्स जानते हैं कि अगले सिंगल ट्रेड का रिजल्ट कुछ भी हो सकता है।
आपका ‘Edge’ या स्ट्रेटजी कम से कम 50 से 100 ट्रेड्स के बाद अपना रंग दिखाती है। जब आप यह मान लेते हैं कि एक स्टॉप-लॉस हिट होना सिर्फ एक Statistical Event है, तो डर अपने आप खत्म हो जाता है।
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रिस्क पर ट्रेड का थंब रूल।
अपनी पोजीशन का साइज तब तक छोटा रखें, जब तक कि, लॉस होने वाला अमाउंट आपको मानसिक रूप से परेशान न करे।
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द रूल: किसी भी एक ट्रेड में अपने कुल कैपिटल का 1% से 2% से ज्यादा का रिस्क कभी न लें।
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एसिड टेस्ट: अगर ट्रेड लॉस में जाने पर आपकी धड़कनें तेज हो रही हैं या आप बार-बार पोर्टफोलियो देख रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि, आपकी पोजीशन का साइज आपकी औकात से बड़ा है।
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खुद के लिए बनाएं एक ‘कूल-डाउन’ प्रोटोकॉल।
एक बार लॉस होने के बाद गुस्सा आना स्वाभाविक है, जिसे हम ‘रिवेंज ट्रेडिंग’ कहते हैं। इससे बचने का एक ही तरीका है—सिस्टम जनरेटेड रूल्स।
तय करें कि, अगर दिन में दो बार स्टॉप-लॉस हिट हो गया, या कैपिटल का 3% साफ हो गया, तो आप टर्मिनल बंद कर देंगे। उसके बाद स्क्रीन को देखना भी मना है।
सिस्टमैटिक रूटीन प्लान बनाइये।
इच्छाशक्ति एक सीमित रिसोर्स है, जो लाइव मार्केट की वोलेटिलिटी में पिघल जाती है। इसलिए आपको रूटीन को मैकेनिकल बनाना होगा।
| रूटीन का चरण | मुख्य फोकस | मानसिक लाभ |
| प्री-मार्केट सेटअप | डेली प्लान और की-लेवल्स | लाइव मार्केट के दौरान अचानक और जल्दबाजी में ट्रेड लेने की बीमारी से मुक्ति। |
| इंट्राडे एग्जीक्यूशन | फिक्स्ड रिस्क टू रिवॉर्ड | चलते हुए ट्रेड में बार-बार मॉडिफिकेशन करने या स्टॉप-लॉस हटाने का लालच खत्म। |
| पोस्ट-मार्केट रिव्यू | ट्रेडिंग जर्नल और मिस्टेक्स लॉग | मुनाफे या नुकसान से ध्यान हटकर पूरी तरह प्रोसेस और अनुशासन पर फोकस। |
ट्रेडिंग एक बिजनेस है, जुआ नहीं।
मार्केट को अवसरों का एक अंतहीन खेल मानें। एक स्टॉप-लॉस का हिट होना बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी दुकान का किराया देना या बिजली का बिल भरना।
यह आपके बिजनेस को चलाने की लागत Cost of doing business है। जिस दिन आप अपने आत्मसम्मान को किसी एक ट्रेड के नफा-नुकसान से जोड़ना बंद कर देंगे, उस दिन आप एक आम ट्रेडर से एक प्रोफेशनल सिस्टम ऑपरेटर बन जाएंगे।












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