नमस्कार दोस्तों, मार्केट मुमेंटम (momentum trading strategy in hindi) को जाने बिना आप शेयर मार्केट में सफल ट्रेडर नहीं बन सकते। मार्केट आज मूवमेंट करेगा या नहीं या फिर दिन भर साइडवेज ही रहेगा। ये जानना इस इंडिकेटर के इस्तिमाल से बहुत आसान हो जाता है।
Momentum Trading ka Basic Concept
मोमेंटम ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है, जिसमें ट्रेडर्स उन शेयरों या एसेट्स में निवेश करते हैं जिनकी कीमत तेज़ी से ऊपर या नीचे की दिशा में बढ़ रही होती है। इस रणनीति का मुख्य सिद्धांत यह है कि, जो ट्रेंड चल रहा है, वह कुछ समय तक और जारी रह सकता है।
अगर कोई शेयर लगातार ऊपर जा रहा है, तो माना जाता है कि उसमें अभी और तेजी आ सकती है। ट्रेडर्स तकनीकी संकेतकों जैसे RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स), Moving average convergence divergence (MACD) और वॉल्यूम का उपयोग करके इस मोमेंटम को पहचानते हैं।
मोमेंटम ट्रेडिंग में सही समय पर एंट्री और एग्जिट करना बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह आमतौर पर शॉर्ट-टर्म या मीडियम-टर्म ट्रेडिंग होती है। इसमें जोखिम अधिक होता है, लेकिन सही रणनीति अपनाने पर अच्छे मुनाफे की संभावना भी होती है।
Momentum Trading Kaise Kaam Karti Hai
मोमेंटम ट्रेडिंग इस सिद्धांत पर काम करती है कि, अगर किसी स्टॉक या एसेट की कीमत एक दिशा में तेज़ी से बढ़ रही है, तो वह गति कुछ समय तक बनी रह सकती है। इसमें ट्रेडर्स उन शेयरों को पहचानते हैं जो या तो तेजी (uptrend) या मंदी (downtrend) में हों और उनमें उच्च वॉल्यूम और वोलाटिलिटी हो। मोमेंटम ट्रेडर्स तकनीकी टूल्स जैसे मूविंग एवरेज, RSI, MACD और ब्रेकआउट पैटर्न का इस्तेमाल करके ट्रेड में एंट्री और एग्जिट के सही पॉइंट्स को निर्धारित करते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर कोई शेयर अपने रेजिस्टेंस लेवल को तोड़ता है और वॉल्यूम के साथ ऊपर जाता है, तो उसे एक मजबूत मोमेंटम माना जाता है। इस रणनीति में ट्रेड कम समय के लिए होते हैं और लक्ष्य होता है उस मोमेंटम का लाभ उठाकर जल्दी मुनाफा कमाना।
momentum trading strategy in hindi
इस से आप फेक ब्रेकआउट के चंगल में आकर ओवर ट्रेडिंग करने से अपने आपको बचा सकते हैं। शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करते समय आपको मार्केट के मुमेंटम के बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी हो जाता है।
ये इंडिकेटर मार्केट साइडवेज हो या फिर ट्रेंडिंग हर समय आपको अच्छे ट्रेड अपर्चुनिटीज खोज कर दिला सकता है। जिससे आपकी ट्रेडिंग एक्यूरेसी बढ़ेगी और आपका हर एक ट्रेड सक्सेस होने के चांसेस बढ़ जाएंगे।
तो चलिए आज हम स्टोकास्टिक ओसिलेटर इंडिकेटर के बारे में विस्तार से जानते हैं। Stochastic Oscillator Indicator तक पहुँचने के लिए TradingView वेबसाइट में Indicator पर क्लिक करें, उसके बाद में Stochastic Indicator को सर्च करके उस पर क्लिक करें। जैसे ही आप इस पर क्लिक करेंगे, ये Indicator आपके चार्ट में नीचे दिखाई देगा।
Stochastic Oscillator
Stochastic Oscillator एक Momentum indicator है जिसका उपयोग Overbought or Oversold Price की पहचान करने के लिए किया जाता है। इस Indicator में ऊपर की line 80 और नीचे की line 20 होती है।
जब Stochastic indicator में stock की price 80 से ऊपर चली जाती है तो उसे अधिक Overbought या महँगा माना जाता है और इसे एक market में चल रहे Uptrend momentum से market Downtrend momentum की ओर sift होने का trend change signal भी माना जाता है।
इस indicator का हम तीन method से इस्तेमाल करना सीखेंगे।
Overbought or Oversold price method
जब स्टोकास्टिक इंडिकेटर में स्टॉक की प्राइस AC से ऊपर चली जाती है, तो उसे अधिक ओवर बॉट या महंगा माना जाता है और इसे एक मार्केट में चल रहे अप्ट्रेंड मोमेंटम से मार्केट डाउंट्रेंड मोमेंटम की ओर सिफ्ट होने का ट्रेंड चेंज सिगनल भी माना जाता है।
जब भी स्टोकास्टिक लाइन 80 से नीचे चली जाती है, तो प्राइस अधिक ओवर सोल्ड हो गई है। ऐसा मानकर यहां से कभी भी मार्केट का मोमेंटम अप्ट्रेंड की तरफ चेंज हो सकता है।
जब भी किसी स्टॉक की प्राइस ओवर बॉट एरिया में होती है, तब आप उस स्टॉक में शॉर्ट पोजिशन बना कर प्रॉफिट बना सकते हैं या फिर अपनी पुरानी short position से exit कर सकते हैं और जब कभी भी कोई stock price oversold area में आती है। तब आप उस stock में long position बना कर trend को ride करके अच्छा profit book कर सकते हैं।
लेकिन market के uptrend या फिर downtrend और overbought या oversold area की पहचान करने के लिए आप सिर्फ stochastic oscillator indicator पर निर्भर नहीं रह सकते। इसके साथ आपको Price Action का भी इस्तेमाल करना पड़ेगा तभी आपको Market में सही Trend Change Signal मिलेंगे।
Crossover Entry method
Stochastic Indicator में यहां यह Blue Line को Percentage K कहा जाता है और इस Orange Line को Percentage D कहा जाता है जब भी कोई Stock Up Trend में होता है और यह Percentage K Line, Percentage D Line को उपर से न D कहा जाता है। जब भी कोई stock uptrend में होता है, और ये percentage K line percentage D line को उपर से नीचे cross करती है। तब uptrend change होकर stock में possible downtrend आने के chances बढ़ जाते हैं। जहां buyers market से बाहर होकर sellers market में entry करते हैं।
इसी तरह जब भी कोई stock downtrend में हो, और ये percentage K line percentage D line को नीचे से उपर क्रॉस करती है, तब डाउन ट्रेंड चेंज होकर स्टॉक में possible uptrend आने के चांसेज बढ़ जाते हैं। इस तरीके को crossover entry method कहा जाता है. crossover entry method का इस्तेमाल आप important key level के साथ भी कर सकते हैं।
इस चार्ट में स्टॉक प्राइस बार-बार इस level पर आकर टच कर रही है जिससे यहां पर एक सपोर्ट बनता हुआ आप देखेंगे और इसी समय स्टॉकेस्टिक इंडिकेटर में दोनों लाइन के बिच आपको क्रॉस ओवर दिखेगा। इस कंडीशन में आप दोनों तरफ से कंफर्मेशन मिलने से एक अप साइड का लॉन ट्रेड प्लान कर सकेंगे और ज्यादा देर तक ट्रेड होल्ड करने में आपको कोई परेशानी नहीं होगी।
Divergence Entry method
जब भी किसी स्टॉक की प्राइस अपने सपोर्ट या फिर रेजिस्टेंस पर ट्रेड कर रही होगी तब आप उस स्टॉक में ट्रेड एंट्री बनाने से पहले एक बार स्टॉकास्टिक इंडिकेटर में क्रॉसोवर हो रहा है या नहीं ये देखकर अपनी पोजिशन बना सकते हैं इस टेकनिक का इस्तेमाल करके आप ओवर over trading करने से बचे रहेंगे डिवरजन्स entry method में इस चार्ट में इस point पर stock की price में आपको lower low का price action दिखेगा।
लेकिन उसी वक्त stochastic indicator में आपको उस price point पर higher low का formation होते हुए नजर आएगा। इसका मतलब यहां market में sellers की संख्या धीरे धीरे कम होने से सेलिंग प्रेशर कम हो रहा हैऔर अब मार्केट में बायर्स अपनी एंट्री बना कर प्राइस को यहां से उपर की तरफ ले जाने की कोशिश करेंगे।
ऐसी कंडिशन में आप प्राइस एक्शन में बन रहे सपोर्ट लाइन और स्टोकास्टिक इंडिकेटर में बन रहे डेवरजन्स इन दोनों का इस्तेमाल कर ट्रेड में एंट्री करके इस उपर्चुनिटी का फायदा उठा सकते हैं ट्रेड में एंट्री करके इस उपर्चुनिटी का फायदा उठा सकते हैं।
Popular Momentum Indicators
मोमेंटम ट्रेडिंग में कुछ तकनीकी संकेतक (indicators) बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो प्राइस मूवमेंट की गति और ताकत को मापने में मदद करते हैं। सबसे लोकप्रिय मोमेंटम इंडिकेटर्स में Relative Strength Index (RSI) शामिल है, जो यह बताता है कि कोई स्टॉक ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड।
दूसरा है Moving Average Convergence Divergence (MACD), जो ट्रेंड और मोमेंटम दोनों को दर्शाता है। इसके अलावा Stochastic Oscillator भी एक प्रसिद्ध टूल है जो वर्तमान प्राइस की तुलना एक निश्चित समय के हाई और लो से करता है।
Rate of Change (ROC) और Average Directional Index (ADX) भी ट्रेडर्स द्वारा मोमेंटम को समझने के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये सभी इंडिकेटर्स मिलकर ट्रेडर्स को सही समय पर एंट्री और एग्जिट करने में मदद करते हैं, जिससे रिस्क कम होता है और प्रॉफिट की संभावना बढ़ती है।
Common Mistakes Jo Avoid Karni Chahiye
मोमेंटम ट्रेडिंग करते समय कुछ सामान्य गलतियाँ हैं जिन्हें हर ट्रेडर को अवॉयड करना चाहिए ताकि नुकसान से बचा जा सके। सबसे पहली गलती है – overtrading, यानी बार-बार ट्रेड करना बिना किसी ठोस सिग्नल के।
दूसरी गलती होती है technical indicators पर पूरी तरह निर्भर होना, जबकि मार्केट सेंटिमेंट और न्यूज को भी समझना जरूरी होता है। तीसरी आम गलती है – stop-loss का इस्तेमाल न करना, जिससे एक छोटा नुकसान बड़ा हो सकता है। कई बार ट्रेडर्स भीड़ का अनुसरण करते हुए गलत समय पर एंट्री कर लेते हैं, जिससे मोमेंटम खत्म हो जाता है और नुकसान होता है।
इसके अलावा, profit booking में देर करना और emotions के साथ ट्रेड करना भी बड़ी गलतियाँ मानी जाती हैं। सफल मोमेंटम ट्रेडिंग के लिए नियमबद्ध रणनीति, रिस्क मैनेजमेंट और डिसिप्लिन सबसे जरूरी हैं।
Conclusion
इस लेख में हमने momentum trading strategy को शुरुआत से लेकर अंत तक विस्तार से समझाने का प्रयास किया है। इसमें हमने सभी पॉपुलर momentum indicator के बारे में भी बताने का प्रयास किया है।
इसके साथ ही Stochastic Oscillator के मुख्य उपयोग को भी समझाया गया है, जिसका प्रयोग से आप सफल ट्रेडर बन सकते है।
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